आग और आग
भाग 1: पड़ोस की दीवार
दिल्ली की एक पुरानी कॉलोनी में, जहाँ दीवारें इतनी पतली थीं कि पड़ोसियों की साँसें भी सुनाई दे जाती थीं, वहाँ आर्यन रहता था। एक 28 साल का जवान, जो अभी-अभी नौकरी से घर लौटा था और अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से फ्लैट में रहता था। दिवाली की आग से पड़ोसन भाभी की चुदाई
उसके ठीक बगल वाले फ्लैट में रहते थे गुप्ता जी – एक मध्यम वर्गीय परिवार जिसमें पति रमेश, पत्नी नम्रता, और उनका एक छोटा बेटा था। नम्रता… उस नाम को सोचते ही आर्यन के मन में कुछ हिलोरें मारने लगती थीं।
नम्रता लगभग 32 साल की थी, भारतीय भाभी – गोरा बदन, भरे-पूरे होंठ, 36-30-38 का फिगर जो साड़ी में और भी ज्यादा आकर्षक लगता था। उसकी आँखों में एक शरारत थी, और हँसी में एक मिठास जो आर्यन को हमेशा खींचती थी।
पिछले दो सालों से, आर्यन और नम्रता की दोस्ती हो गई थी। शुरुआत में तो बस “राम-राम” और “कैसे हो” तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह बातचीत गहरी होती गई। व्हाट्सएप पर मैसेज, कभी-कभी छत पर मिलना, किचन की खिड़की से बातें – यह सब एक अनकहे रिश्ते में बदल रहा था।
वे हर तरह की बातें करते – फिल्में, राजनीति, खाना, और कभी-कभी थोड़ी नॉटी बातें भी। लेकिन यह सब एक सीमा तक ही था। आर्यन कभी भी हद पार नहीं करता था, और नम्रता भी अपनी शादीशुदा ज़िंदगी के दायरे में रहती थी।
लेकिन दीवारें कान रखती हैं, और दिल… दिल तो हमेशा कुछ और ही चाहता है।
भाग 2: दीवाली की रात
नवंबर की एक ठंडी शाम थी। कॉलोनी में दीवाली की तरह रौनक थी – दीये जल रहे थे, पटाखे फूट रहे थे, और हर घर से मिठाइयों की खुशबू आ रही थी।
आर्यन अपने बालकनी में खड़ा था, जब उसने सहमी हुई आवाज़ सुनी।
“अरे! अरे भगवान!”
वह आवाज़ नम्रता की थी। आर्यन ने झट से झाँका तो देखा कि गुप्ता जी के घर की बालकनी में नम्रता खड़ी थी और उसकी साड़ी का पल्लू दीये की लौ में पड़कर जल रहा था। आग तेज़ी से उसके कपड़ों में फैल रही थी।
बिना सोचे-समझे, आर्यन बालकनी से कूदकर गुप्ता जी के घर की ओर दौड़ा। दरवाज़ा खुला था – शायद नम्रता ही दीये जलाने आई थी। आर्यन अंदर घुसा और सीढ़ियों से ऊपर बालकनी की ओर भागा।
जब वह पहुँचा, तो नम्रता घबराई हुई खड़ी थी, उसकी साड़ी का एक बड़ा हिस्सा जल चुका था और आग अब उसके पेटीकोट की ओर बढ़ रही थी।
“नम्रता जी! हटिए!” आर्यन चिल्लाया।
वह आगे बढ़ा और अपने हाथों से उसकी साड़ी पकड़कर खींचने लगा। कपड़े जल चुके थे, और नम्रता काँप रही थी। आर्यन ने जल्दी से उसकी साड़ी को खोलना शुरू किया – पहले पल्लू, फिर पूरी साड़ी जो जल रही थी।
“पेटीकोट भी!” आर्यन ने देखा कि आग पेटीकोट तक पहुँच गई है।
नम्रता की आँखों में आँसू थे, डर से वह काँप रही थी। आर्यन ने उसकी कमर पर हाथ डाला और जलती हुई साड़ी को पूरी तरह खोलकर फेंक दिया। फिर उसने उसका पेटीकोट भी उतारना शुरू किया – वह भी आग की लपटों में था।
कुछ ही सेकंड में, नम्रता सिर्फ़ अपनी ब्रा और पैंटी में खड़ी थी, काँपती हुई, रोती हुई।
आर्यन ने अपनी टी-शर्ट उतारी और उसके जले हुए हाथों पर लपेट दी। “ठीक है… सब ठीक है… आग बुझ गई,” उसने धीरे से कहा।
नम्रता ने उसकी ओर देखा। उसके बदन पर कुछ जलने के निशान थे, लेकिन बड़ी चोट नहीं थी। लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सा डर और शर्मिंदगी थी – वह पहली बार आर्यन के सामने इतनी कम कपड़ों में थी, और वह भी ऐसी हालत में।
“ध… धन्यवाद,” उसने काँपते होंठों से कहा।
“पहले अंदर चलो,” आर्यन ने कहा, “यहाँ ठंड है।”
वे अंदर आए। घर में कोई नहीं था – रमेश और बेटा किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे, और नम्रता घर पर अकेली दीये जला रही थी।
आर्यन ने उसे सोफे पर बैठाया और पानी लाकर उसके हाथों पर लगाया। नम्रता अभी भी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी, और उसने अपने हाथों से अपने शरीर को ढकने की कोशिश की।
“मैं… मैं कपड़े लेकर आती हूँ,” उसने कहा।
“रुको,” आर्यन ने उसका हाथ पकड़ा, “पहले यह बताओ, कहीं और तो नहीं जला? कहीं और दर्द तो नहीं?”
नम्रता ने सिर हिलाया। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन उन आँसुओं के पीछे कुछ और भी था – एक कृतज्ञता, एक अजीब सी नज़दीकी।
“तुमने… तुमने मेरी जान बचाई,” उसने धीरे से कहा।
आर्यन ने उसकी ओर देखा। नम्रता की ब्रा सफ़ेद रंग की थी, और उसके भरे हुए स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे उसकी साँसों के साथ। उसकी पैंटी भी सफ़ेद थी, और उसकी गोरी जाँघें काँप रही थीं।
दोनों की आँखें मिलीं। और उस पल, कुछ बदल गया।
भाग 3: छत की ओर
“मैं… मैं ऊपर छत पर हवा खाने जा रही हूँ,” नम्रता ने अचानक कहा, “तुम भी आओ… वहाँ कोई नहीं होगा। मुझे… मुझे तुमसे कुछ कहना है।”
आर्यन समझ गया कि यह कोई आम बातचीत नहीं होगी। उसने हाँ में सिर हिलाया।
नम्रता अंदर गई और एक लंबी टी-शर्ट पहनी – शायद रमेश की। वह नीचे से उसकी जाँघें ढक रही थी, लेकिन ऊपर से उसके बदन का आकार साफ़ दिख रहा था।
वे दोनों छत की ओर चले गए। दीवाली की रात थी, और आसमान में पटाखों की रोशनी चमक रही थी। पूरी कॉलोनी में उत्सव का माहौल था, लेकिन इस छत पर, दो लोग अकेले थे – एक दूसरे के करीब आते हुए।
छत पर एक पुराना सोफा रखा था, जो अक्सर सूखने के लिए कपड़ों से ढका रहता था। आज वह खाली था। नम्रता ने सोफे पर बैठने का इशारा किया।
“आर्यन,” उसने धीरे से कहा, “आज तुमने जो किया… मैं ज़िंदगी भर नहीं भूलूँगी।”
“कोई भी करता,” आर्यन ने कहा।
“नहीं,” नम्रता ने सिर हिलाया, “सिर्फ़ तुमने किया। और तुमने… तुमने मेरे सारे कपड़े उतार दिए।”
यह सुनते ही आर्यन का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। “वो… वो तो आग…”
“मुझे पता है,” नम्रता ने उसकी ओर देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, “लेकिन तुमने मुझे देखा। पहली बार… इतने करीब से।”
आर्यन चुप रहा। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
“कैसी लगी मैं?” नम्रता ने पूछा, उसकी आवाज़ में एक शरारत थी जो पहले कभी नहीं सुनी थी।
“नम्रता जी…”
“नम्रता,” उसने सुधारा, “बस नम्रता।”
वह आर्यन के करीब आई। इतने करीब कि उसकी साँसें उसके चेहरे पर महसूस हो रही थीं। पटाखों की आवाज़ों के बीच, दो दिलों की धड़कन सुनाई दे रही थी।
“आर्यन… मैं… मैं हमेशा से…”
उसने अपना वाक्य पूरा नहीं किया। उसने अपने होंठ आर्यन के होंठों पर रख दिए।
भाग 4: पहला चुंबन
वह चुंबन धीमा था, हल्का सा, जैसे कोई पंख छू जाए। नम्रता के होंठ काँप रहे थे, और आर्यन को लगा कि वह सपना देख रहा है।
लेकिन यह सपना नहीं था। नम्रता के मुलायम होंठ उसके होंठों पर थे, और उसके हाथ उसके चेहरे को सहला रहे थे।
“मैं… मैं समझ नहीं पा रहा…” आर्यन ने धीरे से कहा।
“चुप रहो,” नम्रता ने फिर से उसे चूमा, इस बार थोड़ा ज़ोर से, “बस महसूस करो।”
उसने अपने हाथ आर्यन के बालों में फेरे और उसे अपनी ओर खींचा। आर्यन ने भी अब अपने हाथ उसकी कमर पर रख दिए – वह टी-शर्ट के नीचे कुछ नहीं पहने थी, और उसकी त्वचा गरम थी।
चुंबन गहरा होता गया। नम्रता ने अपने होंठ खोले और आर्यन की जीभ को अपने मुँह में आमंत्रित किया। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं, एक-दूसरे को चूस रही थीं, और एक पागलपन सा हावी हो रहा था।
“उम्म्म… आह्ह्ह…” नम्रता ने हल्की सी आवाज़ निकाली जब आर्यन ने उसकी गर्दन पर चुंबन करना शुरू किया।
“तुम… तुम बहुत प्यारे हो,” आर्यन ने उसकी गर्दन चूमते हुए कहा।
“और तुम… तुम बहुत बहादुर हो,” नम्रता ने साँसें फुलाते हुए कहा, “मेरी जान बचाई तुमने… अब मैं तुम्हें अपना सब कुछ देना चाहती हूँ।”
आर्यन ने उसकी टी-शर्ट उठानी शुरू की। नम्रता ने थोड़ा सा विरोध किया, लेकिन फिर हार मान ली। टी-शर्ट ऊपर उठी और उसके सिर से निकल गई।
अब नम्रता फिर से सिर्फ़ अपनी सफ़ेद ब्रा और पैंटी में थी। चाँदनी रात में, उसका गोरा बदन चाँद की तरह चमक रहा था।
“कितनी सुंदर हो तुम,” आर्यन ने फुसफुसाते हुए कहा।
“देखो… छूकर देखो,” नम्रता ने उसका हाथ अपने स्तन पर रख दिया।
भाग 5: स्तनों की पूजा
आर्यन ने नम्रता की ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया। वे भरे हुए थे, मुलायम, और गरम। नम्रता की साँसें तेज़ हो गईं और उसने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया।
“आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही…” उसने धीरे से कहा।
आर्यन ने उसकी ब्रा के हुक को खोला। ब्रा ढीली हो गई और उसने उसे हटा दिया। नम्रता के स्तन आज़ाद हो गए – गोल, गुलाबी निप्पल्स के साथ, जो तन चुके थे उत्तेजना से।
“हाय्य्य… ठंड लग रही है…” नम्रता ने कहा।
“मैं गरम कर देता हूँ,” आर्यन ने कहा और उसके स्तनों पर अपने होंठ रख दिए।
उसने पहले एक स्तन को अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। नम्रता की जीभ से “उम्म्म… आह्ह्ह…” की आवाज़ निकलने लगी। आर्यन ने अपनी जीभ से उसके निप्पल को चटोरा, फिर दूसरे स्तन को भी वही सलूक किया।
“ओह्ह्ह… माय गॉड… आर्यन… यह… यह बहुत अच्छा लग रहा है…” नम्रता काँप रही थी।
आर्यन ने अपने हाथों से उसके स्तनों को दबाना शुरू किया, कभी हल्के से, कभी ज़ोर से। वे मुलायम थे, जैसे दूध की बर्फ़ी, और उसके हाथ उनमें धँस रहे थे।
“तुम्हारे… तुम्हारे स्तन बहुत सुंदर हैं,” आर्यन ने कहा, “मैं इन्हें पूरा दिन चूसता रहूँ।”
“हाँ… हाँ… चूसो… और चूसो…” नम्रता ने उसका सिर अपने स्तनों पर दबाया, “मैं… मैं तुम्हारी हूँ आज… जो चाहो करो मुझसे।”
आर्यन ने उसे सोफे पर लिटा दिया और उसके पूरे बदन पर चुंबन करना शुरू किया – गर्दन, कंधे, बाँहें, पेट, और फिर नाभि के पास। नम्रता काँप रही थी, उसकी जाँघें आपस में रगड़ रही थीं।
“नीचे… और नीचे…” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक भीख थी।
भाग 6: पैंटी का उतरना
आर्यन ने नम्रता की पैंटी के किनारे पर अपने होंठ रखे। वह सफ़ेद रंग की लेस वाली पैंटी थी, और उसके ऊपर से ही उसकी योनि की गंध आ रही थी – एक मीठी, मादक गंध।
उसने पैंटी को नीचे खींचना शुरू किया। नम्रता ने अपनी कमर उठाई और पैंटी उसके पैरों से निकल गई।
अब वह पूरी तरह नंगी थी। चाँदनी में, उसका शरीर एक देवी की तरह लग रहा था – गोरा बदन, गोल स्तन, संकरा कमर, और फूली हुई जाँघें। उसकी योनि पर हल्के बाल थे, और वह गीली थी – आर्यन उसकी चमक देख सकता था।
“देखो… देखो मुझे,” नम्रता ने अपने पैर फैलाए, “मैं… मैं शर्मा रही हूँ… लेकिन तुम्हें देखने देना चाहती हूँ।”
“तुम… तुम बहुत खूबसूरत हो,” आर्यन ने कहा, उसकी आवाज़ भारी थी।
उसने नम्रता की जाँघों पर चुंबन करना शुरू किया। अंदर की जाँघ, जो सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है। नम्रता काँप उठी।
“आह्ह्ह… हाँ… वहाँ… वहाँ…” उसने कहा।
आर्यन धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा था। नम्रता की योनि के पास पहुँचकर उसने रुककर उसे देखा। वह गुलाबी थी, भीगी हुई, और पुलक रही थी।
उसने अपनी जीभ निकाली और एक लंबा चाटा लगाया – नीचे से ऊपर तक।
“हाय्य्य… ओह्ह्ह माय गॉड!” नम्रता चिल्लाई, उसका पूरा शरीर काँप गया, “यह… यह क्या कर रहे हो?”
“चाट रहा हूँ तुम्हें,” आर्यन ने कहा, “तुम्हारी चूत को चाट रहा हूँ।”
यह शब्द सुनते ही नम्रता और ज़्यादा गरम हो गई। “हाँ… हाँ… चाटो… चाटो मेरी चूत को… उम्म्म… आह्ह्ह…”
आर्यन ने अपनी जीभ उसकी योनि के भीतर डाल दी और चूसना शुरू किया। वह गीली थी, गरम थी, और उसका स्वाद नमकीन-मीठा था। नम्रता अपनी कमर हिला रही थी, आर्यन के मुँह पर अपनी योनि दबा रही थी।
“उफ्फ्फ… आह्ह्ह… हाँ… और ज़ोर से… जीभ अंदर डालो…” वह चिल्ला रही थी, “मैं… मैं पागल हो रही हूँ…”
आर्यन ने उसकी क्लिटोरिस को अपने होंठों में ले लिया और चूसना शुरू किया। नम्रता का पूरा शरीर तन गया।
“ओह्ह्ह… आह्ह्ह… हाय्य्य… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” उसने चिल्लाया।
और फिर वह झड़ गई। उसकी योनि से एक तरल पदार्थ निकला और आर्यन के मुँह में भर गया। नम्रता काँपती रही, उसकी साँसें तेज़ थीं, और वह आर्यन के बालों को पकड़े हुए थी।
“वाह… यह… यह कमाल था…” उसने हाँफते हुए कहा।
भाग 7: कपड़े उतरना
अब नम्रता की बारी थी। उसने आर्यन को खड़ा किया और उसकी टी-शर्ट उतारी। फिर उसने उसकी पैंट की बेल्ट खोली और पैंट नीचे की।
आर्यन का लिंग पहले से ही कड़ा था, और उसने अंडरवियर में एक टेंट बना रखा था। नम्रता ने उसे देखा और मुस्कुराई।
“वाह… कितना बड़ा है…” उसने कहा और उसके अंडरवियर को नीचे खींचा।
आर्यन का लिंग बाहर आ गया – लगभग 7 इंच लंबा, मोटा, और गुलाबी सिरे के साथ। नम्रता की आँखें चौड़ी हो गईं।
“यह… यह तो बहुत बड़ा है,” उसने कहा, “मैं… मैं डर रही हूँ।”
“मत डरो,” आर्यन ने उसके सिर को सहलाया, “मैं धीरे-धीरे करूँगा।”
नम्रता ने उसके लिंग को अपने हाथ में लिया। वह गरम था, और उसकी नसें उभरी हुई थीं। उसने उसे सहलाना शुरू किया, ऊपर-नीचे।
“कैसा लग रहा है?” उसने पूछा।
“बहुत अच्छा,” आर्यन ने कहा, उसकी आँखें बंद थीं।
नम्रता ने उसके लिंग को अपने मुँह के पास लाया और जीभ से उसके सिरे को चाटा। आर्यन काँप उठा।
“उम्म्म… यह… यह स्वादिष्ट है,” नम्रता ने कहा और फिर उसे अपने मुँह में ले लिया।
वह उसे चूसने लगी, धीरे-धीरे, फिर तेज़ी से। आर्यन ने अपने हाथ उसके सिर पर रखे और उसे नीचे की ओर धकेलना शुरू किया।
“आह्ह्ह… हाँ… और गहरा… पूरा अंदर ले लो…” उसने कहा।
नम्रता ने पूरी कोशिश की, लेकिन वह इतना बड़ा था कि वह सिर्फ़ आधा ही ले पाई। उसने अपने हाथों से बाकी हिस्से को सहलाते रही।
“बस… बस… रुको…” आर्यन ने कहा, “मैं… मैं निकलने वाला हूँ… मैं तुम्हारे अंदर जाना चाहता हूँ…”
नम्रता ने उसका लिंग मुँह से बाहर निकाला और लार से भीगे हुए होंठों से मुस्कुराई। “हाँ… आओ… मुझे चोदो… मुझे अपनी बनाओ।”
भाग 8: पहला प्रवेश
आर्यन ने नम्रता को सोफे पर लिटाया और उसके पैरों के बीच आ गया। उसने अपने लिंग को उसकी योनि के मुँह पर रखा और सहलाना शुरू किया।
“तैयार हो?” उसने पूछा।
“हाँ… लेकिन धीरे से… मैं… मैं बहुत दिनों से… मतलब… रमेश जी तो…” नम्रता शर्मा गई।
“मैं समझता हूँ,” आर्यन ने कहा और धीरे से अपना लिंग अंदर धकेलना शुरू किया।
नम्रता की योनि बहुत टाइट थी। आर्यन को लगा जैसे वह किसी गरम, गीली जगह में घुस रहा हो। नम्रता ने दर्द से चीखना शुरू किया।
“आह्ह्ह… धीरे… धीरे… बहुत मोटा है…” उसने कहा और अपने नाखून आर्यन की पीठ में गड़ा दिए।
आर्यन रुका। “दर्द हो रहा है?”
“हाँ… लेकिन… लेकिन अच्छा दर्द है… और अंदर डालो… धीरे-धीरे…”
आर्यन ने धीरे-धीरे अपना पूरा लिंग अंदर डाल दिया। वह पूरी तरह से उसके अंदर था, उसकी योनि ने उसे कस लिया था।
“ओह्ह्ह… माय गॉड… यह… यह बहुत गहरा है…” नम्रता ने कहा, उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी।
आर्यन ने धीरे से अपनी कमर हिलानी शुरू की। पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज़। नम्रता की आवाज़ें निकलने लगीं।
“उम्म्म… आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… और तेज़…”
“तुम… तुम बहुत टाइट हो,” आर्यन ने हाँफते हुए कहा।
“और तुम… तुम बहुत बड़े हो…” नम्रता ने कहा और अपनी कमर उठाकर उसके हर धक्के का जवाब देना शुरू किया।
दोनों एक ताल में चलने लगे। आर्यन के लिंग बाहर आता और फिर पूरा अंदर चला जाता। नम्रता की योनि से आवाज़ें आ रही थीं – चपचप की आवाज़ें, गीली आवाज़ें।
“चप… चप… चप…”
“आह्ह्ह… हाँ… और ज़ोर से…” नम्रता चिल्ला रही थी, “मुझे… मुझे चोदो… अपनी रखैल बनाओ मुझे…”
यह शब्द सुनते ही आर्यन और ज़्यादा उत्तेजित हो गया। उसने नम्रता की टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।
“पच… पच… पच…”
“हाय्य्य… ओह्ह्ह… उफ्फ्फ… मैं… मैं मर जाऊँगी…” नम्रता सिसक रही थी।
भाग 9: विभिन्न आसन
कुछ देर बाद, आर्यन ने अपना लिंग बाहर निकाला और नम्रता को घोड़ी बनने का इशारा किया। नम्रता ने सोफे पर घुटने टेक दिए और अपनी पीठ आर्यन की ओर कर ली।
“क्या… क्या अब पीछे से?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ में शर्म और उत्सुकता दोनों थी।
“हाँ… मैं तुम्हें ऐसे चोदना चाहता हूँ,” आर्यन ने कहा।
उसने अपना लिंग उसकी योनि के मुँह पर रखा और एक ही धक्के में पूरा अंदर डाल दिया। नम्रता चीख उठी।
“आह्ह्ह… हाय्य्य… यह… यह और भी गहरा लग रहा है…”
आर्यन ने उसकी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू किए। नम्रता के स्तन नीचे-ऊपर हो रहे थे, और वह अपने हाथों से सोफे को पकड़े हुए थी।
“पच… पच… पच…”
“ओह्ह्ह… आह्ह्ह… हाँ… मारो… और मारो…” नम्रता चिल्ला रही थी, “मेरी चूत फाड़ दो…”
आर्यन ने उसके बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा। नम्रता का चेहरा ऊपर उठ गया और आर्यन ने उसके गाल पर चुंबन किया।
“तुम… तुम मेरी हो,” उसने फुसफुसाते हुए कहा।
“हाँ… हाँ… मैं तुम्हारी हूँ… सिर्फ़ तुम्हारी…” नम्रता ने कहा।
अब आर्यन ने उसे लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया। मिशनरी पोज़िशन में, वे एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। आर्यन ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए, और नम्रता ने अपने पैर उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिए।
“उम्म्म… आह्ह्ह… यह… यह बहुत रोमांटिक है…” नम्रता ने कहा।
“मैं… मैं तुमसे प्यार करता हूँ,” आर्यन ने कहा, यह शब्द उसके मुँह से बिना सोचे निकल गए।
नम्रता की आँखों में आँसू आ गए। “मैं भी… मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ… हमेशा से…”
वे एक-दूसरे को चूमने लगे जबकि आर्यन उसे चोद रहा था। उनके शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे, पसीने से तर, और दोनों की साँसें एक दूसरे के मुँह में जा रही थीं।
भाग 10: गांड की चुदाई
काफी देर तक योनि में चोदने के बाद, आर्यन ने अपना लिंग बाहर निकाला। वह अभी भी कड़ा था, और उसे और चाहिए था।
“एक… एक और जगह है…” उसने धीरे से कहा।
नम्रता समझ गई। उसकी आँखें चौड़ी हुईं। “वो… वो… मैंने कभी…”
“मैं धीरे से करूँगा,” आर्यन ने कहा, “अगर दर्द हो तो बता देना।”
नम्रता ने हिचकिचाते हुए हाँ में सिर हिलाया। वह घोड़ी बन गई और आर्यन ने अपने लिंग पर थूक लगाया और उसकी गांड के छेद पर भी थूक लगाया।
“धीरे से… प्लीज़…” नम्रता ने कहा।
आर्यन ने अपने लिंग का सिरा उसकी गांड के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। नम्रता चीख उठी।
“आह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… रुको…”
आर्यन रुक गया। उसने अपने हाथ से नम्रता की योनि को सहलाना शुरू किया, उसकी क्लिटोरिस को दबाया। नम्रता फिर से उत्तेजित होने लगी और दर्द कम होने लगा।
“अब… अब थोड़ा और अंदर डालो…” उसने कहा।
आर्यन ने धीरे-धीरे अपना पूरा लिंग उसकी गांड में डाल दिया। वह बहुत टाइट थी, और गरम। नम्रता साँसें ले रही थी, दर्द से उसका चेहरा लाल हो गया था।
“ओह्ह्ह… माय गॉड… यह… यह बहुत बड़ा लग रहा है…” उसने कहा।
“मैं रुकूँ?” आर्यन ने पूछा।
“नहीं… नहीं… चलो… धीरे-धीरे…” नम्रता ने कहा।
आर्यन ने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू की। पहले तो नम्रता को दर्द हो रहा था, लेकिन फिर वह दर्द मज़े में बदलने लगा। उसकी गांड ने उसे इतनी टाइट पकड़ रखा था कि आर्यन को बहुत मज़ा आ रहा था।
“आह्ह्ह… हाँ… अब अच्छा लग रहा है…” नम्रता ने कहा, “थोड़ा तेज़ करो…”
आर्यन ने गति बढ़ाई। अब वह उसकी गांड को ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था, और नम्रता चिल्ला रही थी।
“पच… पच… पच…”
“हाय्य्य… ओह्ह्ह… उफ्फ्फ… मेरी गांड फाड़ दो… और ज़ोर से…” वह चिल्ला रही थी।
आर्यन ने उसके बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा। “कैसा लग रहा है? मेरी रंडी बनकर?”
“बहुत… बहुत अच्छा…” नम्रता ने कहा, “मैं… मैं तुम्हारी रंडी हूँ… मुझे चोदो… मेरी गांड मारो…”
भाग 11: अंतिम क्षण
आर्यन को लगा कि वह अब नहीं रुक पाएगा। उसने नम्रता को लिटाया और उसकी योनि में फिर से अपना लिंग डाल दिया। वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा, और नम्रता भी अपनी कमर उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” नम्रता ने कहा, “तुम… तुम भी साथ में…”
“हाँ… हाँ…” आर्यन ने कहा, “एक साथ…”
वे दोनों तेज़ी से चलने लगे। नम्रता की साँसें तेज़ हो गईं, उसका शरीर तन गया, और फिर वह झड़ गई। उसकी योनि ने आर्यन के लिंग को कसकर पकड़ लिया और उसमें झनझनाहट होने लगी।
“आह्ह्ह… ओह्ह्ह… माय गॉड… उम्म्म…” नम्रता चिल्लाई।
आर्यन भी झड़ने वाला था। उसने ज़ोर से एक आखिरी धक्का लगाया और अपना लिंग गहराई तक डाल दिया। और फिर उसका वीर्य निकलने लगा – गरम, गाढ़ा, नम्रता की योनि के गहराई में भरता हुआ।
“उह्ह्ह… आह्ह्ह… हाँ…” आर्यन ने कराहते हुए कहा।
दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, पसीने से तर, साँसें फुलाते हुए। नम्रता ने आर्यन को कसकर पकड़ा और उसके गाल पर चुंबन किया।
“यह… यह रात मैं कभी नहीं भूलूँगी,” उसने धीरे से कहा।
“मैं भी नहीं,” आर्यन ने कहा।
वे कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे, एक-दूसरे को सहलाते हुए, चूमते हुए। पटाखों की आवाज़ें अब कम हो गई थीं, और चाँद ऊँचाई पर चमक रहा था।
भाग 12: अगली सुबह
जब सुबह हुई, तो नम्रता अपने घर लौट गई। रमेश और बेटा अभी भी वापस नहीं आए थे। आर्यन अपने कमरे में लेटा हुआ था, रात की यादों में खोया हुआ।
उसके फोन पर एक मैसेज आया – नम्रता का।
“आज रात फिर आना… रमेश दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं। मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगी। और इस बार… इस बार और भी कुछ करेंगे।”
आर्यन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। “मैं तैयार हूँ। तुम्हारे लिए, हमेशा तैयार।”
और इस तरह, एक नया रिश्ता शुरू हुआ – एक पड़ोसी और एक पड़ोसन का, एक भाभी और एक देवर का, एक आदमी और एक औरत का जो प्यार और वासना दोनों में डूब गए।
दीवाली की वो रात, जब आग लगी थी साड़ी में, उसने दो दिलों में भी आग लगा दी थी – एक ऐसी आग जो शायद कभी नहीं बुझेगी।
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